हिंदी अनुवादः डॉ. मोहम्मद क़मर तबरेज़

SANGUR, PUNJAB
|MON, JUL 16, 2018
आधारः व्यवस्था की जीत, जनता की हार
पारी पर स्टोरीज़ की श्रंखला की कैसे जनता को राशन, विकलांगता पेंशन, मनरेगा मज़दूरी, छात्रवृत्ति आदि देने से केवल इसलिए मना कर दिया गया, क्योंकि यूआईडीएआई ने उनके नाम की वर्तनी ग़लत लिख दी थी, उनके बायोमेट्रिक्स मेल नहीं खा रहे थे, और इसी प्रकार की अन्य ख़राबियां थीं
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7. जिनसे वोट तो लिए जाते हैं, पर आधार के लिए उनका होना काफ़ी नहीं
कुष्ठ रोग के कारण पार्वती देवी की अंगुलियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं. अतः लखनऊ में कचरा चुनने वाली सफ़ाईकर्मी और संभवत: इस बीमारी से पीड़ित हज़ारों अन्य लोगों को आधार कार्ड नहीं मिल सकता; और इसके बिना उनको विकलांगता पेंशन या राशन भी नहीं मिल सकेगा
6. राशन कार्ड में खोट या फ़र्ज़ी है आधार डेटा?
बेमेल नंबर, ग़लत तस्वीरें, गायब नाम, फिंगरप्रिंट की त्रुटियां - आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में इस प्रकार के आधार भरे पड़े हैं. इसका सबसे ज़्यादा नुक़सान बीपीएल कार्डधारकों को हो रहा है जिन्हें महीनों से राशन से वंचित रखा जा रहा है
5. आधार ने लूटी लक्ष्मी की कमाई
कड़ी मेहनत से कमाई गई मज़दूरी पाने में असमर्थ, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम ज़िले के मनरेगा मज़दूरों को पता लगने लगा है कि धन की देवी का नाम रख लेने पर भी आप आधार की विभिन्न गड़बड़ियों से बच नहीं सकते
4. ‘जो थोड़ा-बहुत बाक़ी था वह भी आधार ने छीन लिया’
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ों में आधार केंद्रों तक जाने में लगने वाला भारी किराया, नामों की वर्तनी की ग़लती, तथा अन्य गड़बड़ियों के कारण चंपावत ज़िले की कई विधवाओं, विकलांगों, और बुज़ुर्गों को महीनों से उनकी पेंशन नहीं मिली है
3. अगर मशीन ने आपको नहीं पहचाना, तो राशन नहीं मिलेगा
बेंगलुरु की झुग्गियों में रहने वाले बुज़ुर्ग, प्रवासी, दिहाड़ी मज़दूरी, और यहां तक कि बच्चे भी उन लोगों में शामिल हैं जिनकी उंगलियों के निशान मेल न खाने के कारण उन्हें उनका मासिक राशन देने से मना कर दिया जा रहा है. आधार के लिए चल रही उनकी जद्दोजहद में, जीत आधार की ही होती है
2. आधार बना छात्रवृत्ति की राह का रोड़ा: भाग 2
आधार की ग़लतियों के कारण आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में दलित तथा मुस्लिम स्कूली बच्चों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, पारी ने इस मुद्दे पर स्टोरी प्रकाशित की थी; जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है

आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ तथा सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016
आधार अधिनियम का उद्देश्य भारत के निवासियों को अनोखी पहचान संख्या सौंपकर उन्हें सब्सिडी, लाभ और सेवाओं की “प्रभावी और पारदर्शी” डिलीवरी प्रदान करना है। इस अधिनियम के तहत स्थापित भारत का विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई), आधार संख्या के लिए लोगों के नामांकन या साइन अप करने, उनकी पहचान की जानकारी सत्यापित करने, आधार संख्या जारी करने, और व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक या निजी संस्थाओं को प्रदान की गई जानकारी को प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार है।
मार्च 26, 2016 | क़ानून और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
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