भारत के गाँव-देहात के ये मन अजादी के पइदल लड़ाका रहिन अऊ अंगरेज राज के खिलाफ अब तक के सबले बड़े लड़ई मन ले कुछेक लड़ई के मुखिया घलो रहिन. वो मन ले अब्बड़ अकन लोगन मन अंगरेज राज ले अजाद कराय सेती अपन परान तक ले निछावर कर दीन. अऊ ये मन ले कतको झिन मन भारी अतियाचार सहे के बाद घलो भारत ला अजाद होवत देखत बांहचे रहिन, तउन मन ला घलो जल्दी भुलाय-बिसोर देय गीस. 1990 के दसक के बाद ले, मंय आखिरी जियंता स्वतंत्रता सेनानी मन के कतको के जिनगी ला रिकॉर्ड करेंय. इहाँ तुमन ला तउन मन के पांच ठन कहिनी पढ़े ला मिलही:

Nuapada, Odisha
|SUN, AUG 07, 2022
अजादी के दस कहिनी
साहस अऊ बलिदान के भुलाय-बिसोर देय कहिनी मन ला दुहरावत जेन मन भारत ला अजादी दिलाइन
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10. जब 'सालिहान' ह अंगरेज मन ले मचाईस रार
अज़ादी के दस कहिनी – 1: देमती देई सबर अऊ ओकर सहेली मन ओडिशा के नुआपाड़ा मं बंदूकधारी अंगरेज अफसर मन ला लऊठी ले पीटे रहिन
9. अजादी मं पनीमारा के पइदल सिपाही – 1
अजादी के दस कहिनी – 2: जब ओडिशा के गरीब गांववाला मन संबलपुर अदालत मं कब्जा कर लीन अऊ वोला चलाय के कोसिस करिन
8. अजादी मं पनीमारा के पईदल सिपाही – 2
अज़ादी के दस कहिनी – 3: ओडिशा के छोटकन बस्ती, जेन ह 'आज़ादी गांव' के नांव पाईस
7. लक्ष्मी पांडा के आख़िरी लड़ई
अज़ादी के दस कहिनी – 9: बदहाल जिनगी जियत गरीब आईएनए स्वतंत्रता सेनानी के सिरिफ अतके मांग रहिस के देस ह ओकर बलिदान ला स्वीकार करय. अऊ एकरे सेती अजादी के 6 दसक बीते बाद घलो ये सियान सैनिक के लड़ई चलत रहिस
अहिंसा के नौ दशक
बाजी मोहम्मद, जेकर अहिंसक लड़ई अज़ादी के 60 बछर बाद तक ले चलत रहिस
अगस्त 14,2015 | पी. साईनाथ
येकरे संगे संग पांच ठन दीगर कहिनी मन के जुम्फा घलो हवय, जेन हा सबले पहिली टाइम्स ऑफ़ इंडिया मं छपे रहिन, वो मन ला इहाँ अऊ जियादा फोटू मन के संग फ़िर ले छापे जावत हवय. ये ‘भुलाय-बिसोरे अजादी’ कड़ी के ताना-बाना तउन गाँव मन के तीर-तखार बुने गे हवय जेन ह बड़े बगावत मन के गढ़ रहिन. भारत के अजादी के लड़ई, सिरिफ सहर के धनवान मन के मसला नई रहिस अऊ न त वो ह ओकरे मन तक ले सीमित रहिस. गाँव-देहात के कतको लोगन मन ये मं भारी बढ़-चढ़ के हिस्सा लेय रहिन अऊ वो मन के लड़ई मं अजादी के मायना कुछु दूसर रहिस. जइसने के, 1857 के कतको लड़ई, गाँव मन मं तउन बखत लड़े जावत रहिस, जेन बखत मुंबई अऊ कोलकाता के धनवान बड़े जमात के लोगन मन अंगरेज मन के सुफल होय सेती मनौती करत रहिन. अजादी के 50 वां बछर, यानि के 1997 मं, मंय वो मन ले कुछेक गाँव गेय रहेंव जिहां के बारे मं तुमन ला तरी लिखाय कहिनी मन ला पढ़े ले मिलही:
5. शेरपुर: बड़े बलिदान के नानकन सुरता
अजादी के दस कहिनी – 4: उत्तर प्रदेश के वो गाँव जेन ह 1942 मं झंडा फहराईस अऊ ओकर खामियाजा भुगतिस
4. गोदावरी: पुलिस ल अभिन ले रार मचाय के अगोरा हवय
अजादी के दस कहिनी – 5: आंध्र प्रदेश के रम्पा ले अल्लूरी सीता राम राज के अगुवाई मं अंगरेज मन के बिरोध मं बड़का लड़ाई लड़े खातिर सुनता बनाय गिस
3. सोनाखान: जब वीर नारायण दू पईंत मरिस
आजादी के दस कहिनी – 6: छत्तीसगढ़ मं वीर नारायण सिंह कऊनों ले कांहूं किसिम के दान दछिना नई मांगिन भले नियाव खातिर लड़त अपन जान गंवा दिहिन
2. कल्लियास्सेरी: सुमुकन ला खोजत
अज़ादी के दस कहिनी – 7: वो गाँव जेन हा हरेक मोरचा मं लड़ई लड़ीस: अंगरेज, ऊहाँ के ज़मींदार मन के, अऊ जात के खिलाफ
1. कल्लियास्सेरी: अजादी के अतके बछर बाद घलो चलत हवय लड़ई
अज़ादी के दस कहिनी – 8: जब शिकारी मन के देंवता ह केरल के कम्युनिस्ट मन ला ब्रिटिश-राज के ख़िलाफ़ लड़ई मं सरन दीस
पारी ह, आख़िरी जियंता स्वतंत्रता सेनानी, जेन मन 90 बछर के हो गे हवंय धन ओकर ले जियादा उमर के हवंय, वो मन ला खोजे अऊ ओकर जिनगी ला दस्तावेज़ के रूप में दरज करे के सरलग कोसिस करत हवय.
अनुवाद: निर्मल कुमार साहू
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