बिमला देवी मेघवाल जाति से आवेली, जे राज्य में अनुसूचित जाति में गिनाला. ई लोग पारंपरिक रूप से खेती, मवेसी पालन आ बुनकरी के काम करत रहल बा. बाकिर सदियन से चलल आ रहल जात-पात के भेदभाव एह समाज के एतना पाछू धकेल देले बा कि पढ़ाई-लिखाई, रोजी-रोटी आ सामाजिक तरक्की में ई लोग बहुते पाछू रह गइल बा.
बिमला के घरवाला कंवरलाल (36) बरिस आ उनकर भाई भोजाराम (32) के स्कूल बीचे में छूट गइल रहे. ऊ लोग नून के खान सब में मजूरी करके आपन छोट भाई-बहिन लोग के खूब बनिहा से पढ़वलक. भूमिहीन दलत किसान कंवरलाल पट्टा पर लेवल 40 बीघा जमीन (इहंवा 4 से 5 बीघा जमीन मोटा-मोटी एक एकड़ होखेला) पर बाजरा, गेहूं, मेथी आ चिनिया बदाम उगावेलन. बाकिर फलोदी में खेती कइल आसान नइखे. बरखा कम होखेला, कब होई कब ना एकर भरोसा ना रहे. सूखा बेर-बेर पड़े से फसल बरबाद हो जाला आ उपज ढंग से ना हो पावे. ई सब इहंवा के आम समस्या बा.
एकदम सुखाड़ वाला इळाका में साल भर में औसतन बस 200 मिली बरखा पड़ेला. एही से पानी इहंवा बहुत कम आ बहुत कीमती बा. बिमला बरतन पर लागल जूठ हटावे खातिर जवन पानी के छींटा मारेली, ऊ घर के बगल में बनल टांका से आवेला. एह टांका में जमीन के नीचे के पानी सहेज के रखल रहेला.
थार मरुभूमि में पानी के किल्लत से निपटे में टांका बहुत काम आवेला. अइसे त बावड़ी आ तालाब के बनिस्पत ई नया तरीका जरूर बा, बाकिर बहुते काम के बा. सन् 1988 में केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अऩुसंधान संस्थान से छपल एगो किताब में बतावल गइल बा कि एह इलाका के पहिल टांका 1607 में राजा सूरसिंह वाड़ी के मेलना गांव में बनवले रहस. बाद में 1759 में जोधपुर के मेहरानगढ़ किला में महाराजा उदयसिंह भी टांका बनवइलन. बाकिर 1895-96 के भयानक अकाल में एह इलाका में खूब टांका बनावल गइल.
बिमला के भतीजा, उऩ्नीस बरिस के बद्रीनारायण चौहान बतावेलन, “बरखा के पानी छत से बह के टांका में जमा हो जाला. आ इहे पानी पिए के काम आऴेला. सीमेंट, कंक्रीट आ पत्थर से बनल ई टांका पस्चिमी राजस्थान में खूब देखे के मिलेला. 10 फीट चौड़ आ 20 फीट लमहर टांका में कोई 56 से 58 लीटर पानी जमा हो सकेला. एकरा बनावे में 50 से 80 हजार रुपइया के खरचा आवेला.”
बिमला के घर में अंगना में दू-दू ठो टांका बा. पुरनका टांका 2001 में बनल रहे, जवना में बरखा के पानी जमा कइल जाला. दोसर नयका आ बड़का टांका घर के जरूरत खातिर कोई 60 हजार लीटर पानी रख सकेला. आजकाल ई बड़ टांका टैंकर से कीन के लावल पानी से भरल जाला. 5 हजार लीटर पानी खातिर कोई 500 रुपइया खरचा करे पड़ेला. ई टैंकर वाला पानी लगे के इंदिरा गांधी नहर के फिल्टर प्लांट से आवेला. भारत के सबले लमहर, इंदिरा गांधी नहर, में पंजाब के हरिके बांध से पानी आवेला, जहंवा सतलुज आ ब्यास नदी मिलेला.