आज के कहानी गांव-देहात के मेहरारू लोग के नाना प्रकार के काम के बारे में बतावे वाला फोटो प्रदर्सनी, ‘कामे काम, महिला गुमनाम’ के हिस्सा ह. फोटो सब साल 1993 से 2022 के बीचे 10 राज्य में घूम-घूम के पी साईनाथ खींचले बाड़न. इंहा, पारी में एकरा के डिजिटल क के औरी सुन्नर बना दहल बा. कई साल ले एकरा के देस के कई गो जघ़े प देखावत जात रहल बा.
कादो, माई औरी ‘दिहाड़ी’
बिजयनगरम में भूमिहीन मजूर लोग के संघे सबेरे के 7 बजे बैठक तय रहे. हमनी देर से पहुंचनी. ओ बेर, मेहरारू लोग लमसम आपन तीन घंटा कार क भईल रहे. जईसे कि इ मेहरारू, जे ताड़ के गाछ के बीच से आवत रहे. चाहे ओ सब के साथी मेहरारू, जे पहलही उंहा बाटे, उ सब गड़हां में के कादो हटावता.
एमे से बेसी मेहरारू लोग खायका बनावल, कपड़ा फींचल औरी घर के दोसर कार क चुकल रहे. उ लोग लयिकन के इस्कूल जाए ला तईयार क देले रहे. परिवार के सब लोग के खियावल जा चुकल रहे. साफ़ बा कि मेहरारू लोग बादे में खईले होई. सरकार के रोजगार गारंटी साईट प, इ एकदम साफ़ बा कि मरद के परतर में मेहरारू के पईसा कम दहल जाला.
ईहो साफ़ बा कि इंहां मरद औरी मेहरारू, दुनू के मामला में न्यूनतम मजूरी अधिनियम के धज्जी उड़ावल जा रहल बा. इहे पूरा देसे में हो रहला बा, केरल औरी पच्छिम बंगाल के छोड़ के. तब्बो, हर जगह मेहरारू के मजूरी मरदाना से आधा चाहे दू तिहाई मिलेला.







