इ ‘कामे काम, कतहूं ना नाम’ नाम के फोटो प्रदर्शनी के हिस्सा ह. एकरा में गांव के मेहरारू लोग के अलग-अलग काम दर्ज कईल बा. इ सब फोटो साल 1993 से 2022 के बीच 10 गो राज्य में घूम-घूम के पी-साईनाथ खिंचले बाड़न. पारी एकरा के डिजिटल बना के औरी सुन्नर बना दहलस. एकरा के कई साल ले देस के कई गो हिस्सा में देखावल जात रहल बा
लचरल जिनगी
विजयनगरम में, उ घामा से हरान हो के तनी देर ले बिलमली. बाकिर पहिलहीं जइसन निहुरले रहली. उ जानत रहली कि छने भर में, उनकर फेर से कार सुरु करे के होई, आ ओही तरे.
इहे काजू के खेत में, उनका गांव के मेहरारू लोग के दुसरो गोल (समूह) रहे. एगो गोल खेत से दू किलोमीटर दूर घर से आपन खयका, पानी साथे ले आईल रहे. दुसरका गोल आपन कार करत रहे. कार करत सब मेहरारू निहुरल रहे.
उडीसा के रायगड़ा के इ खेत में मरदो लोग रहे. लेंस से देखला प इ अजगुत नजारा रहे. सब मरदाना खड़ियायिल (खड़ा) रहे औरी मेहरारू सब निहुरल रहे. उड़ीसा के नुआपाड़ा में, बरखो इ मेहरारू लोग के खेत के खरपतवार सोहे से ना रोक पावत रहे. कमर से नीचे निहुर के उ सब आपन कार कईले जात रहे, एक हाथ में छाता लिहले.








