इ ‘कामे काम, कतहूं ना नाम’ नाम के फोटो प्रदर्शनी के हिस्सा ह. एकरा में गांव के मेहरारू लोग के अलग-अलग काम दर्ज कईल बा. इ सब फोटो साल 1993 से 2022 के बीच 10 गो राज्य में घूम-घूम के पी-साईनाथ खिंचले बाड़न. पारी एकरा के डिजिटल बना के औरी सुन्नर बना दहलस. एकरा के कई साल ले देस के कई गो हिस्सा में देखावल जात रहल बा
खेत त बा, बाकिर आपन नइखे
जमीन के मालिक के फोटो खिंचावे में बहुत गरब होत रहे. उ उंहें अपना के तान के खड़ियाईल रहलन. जबकि, इतने देर में में उनका खेत में रोपनी करत नौ गो मेहरारू लोग के पांत दुगुना गो गईल रहे. उ हमनी से कहलन कि उ ए लोग के एक दिन के 40 रोपया देलन. मेहरारू लोग हमनी के बाद में बतावल कि उ खाली 25 रोपया देले रहलन. इ सब उड़ीसा के रायगड़ा के भूमिहीन महिला मजूर रहे लोग.
भारत में महिला लोग के जमीन के अधिकार नईखे. इ ओहू परिवार के महिला लोग के नईखे, जेकरा लगे जमीन बा. इ अधिकार ना त नयिहर में मिलेला ना ससुरा में. अकेल, बिधवा चाहे तलाक भईल मेहरारू कुल अपना रिश्तेदार के खेतन में मजूरी करे खातिर बेबस होलीं कुल.








