कडल ओसई रेडियो स्टेशन प ए. यशवंत बोलतारन, “बिहाने के 11 बज के 40 मिनट हो गईल बा. एहीसे अब चाल के टटका समाचार बतावल जा रहल बा. पछिला एक हफ्ता औरी एक महीना से काचान काथू (दक्खिनी बयार) बहुत तेज रहे. ओकर चाल 40 से 60 (किलोमीटर प्रति घंटा) रहे. अब इ बुझाता मलाह लोग के मदद खातिर, कम हो के 15 (किलोमीटर प्रति घंटा) प पहुंच गईल बा.”
तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिला के पामबन द्वीप के मलाह लोग ला इ बहुत नीमन समाचार बा. यशवंत, जे अपने एगो मलाह हवन, बतावेलन, “एकर माने बा कि उ लोग बिना डेरायीले दरियाव में जा सकेला.” उ इलाका में रहे वाला समुदाय के एगो रेडियो स्टेशन, कडल ओसई (दरियाव के बोली) में रेडियो जौकी हवन.
रक्तदान प बिसेस प्रसारण सुरु करे खातिर, यशवंत मौसम के रिपोर्ट से लागल आपन बात हेतरे के सब्द के साथे खतम करेलन, “तापमान 32 डिग्री सेल्सियस प पहुंच गईल बा. एसे सबराहे पानी पीयत रहीं औरी घाम में मत जाईं.”
इ एगो जरुरी सावधानी ह, काहे से कि पामबन में अब 1996 से, जौना साले यशवंत के जनम भईल रहे, से बेसी गरम दिन देखे के मिलता. तब, इ द्वीप प साल में कम से कम 162 दिन अइसन होत रहे जब तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के निसान के छू लेवे चाहे ओकरा पार पहुंच जाए. उनकर बाबूजी एंथनी वास, जे अब पूरा समय खातिर मलाह हवन, जब 1973 में जनमल रहलन तब हेतना गरमी साल में 125 दिन से बेसी ना परत रहे. बाकिर अब उ सब गरम दिन के गिनती साल में कम से कम 180 हो चुकल बा. इ कहनाम बा जलवायु परिवर्तन औरी ग्लोबल वार्मिंग प एगो इन्ट्रेक्टिव मसीन से कईल गिनती के. जेकरा के न्यूयार्क टाइम्स ए साल जुलाई में औनलाइन पोस्ट कईले रहे.
एहीसे, यशवंत औरी उनकर सहयोगी मौसम औरी जलवायु के बड़को मामला के समझे के कोसिस करता. उनकर बाबूजी औरी दूसर मलाह लोग, जे लोग के गिनती इ द्वीप के दू गो भारी सहर पामबन औरी रामेश्वरम में 83,000 के करीब बा, ओ लोग से इ आस लगवले बा कि ऊ लोग इ सब फेरबदल के सही मतलब बताई.









