
SANGUR, PUNJAB
|THU, JUL 20, 2023
रण के गीत: कच्छी लोक गीत के खजाना
कच्छ महिला विकास संगठन (केएमवीएस) के सहयोग ले पारी के ये मल्टीमीडिया कोठी, कच्छ के लोग संगीत के एक ठन पोट्ठ खजाना आय. 341 गाना मं मया-पिरित, मनोरथ, नुकसान, बिहाव, माटी महतारी, लिंग जागरूकता, प्रजातांत्रिक हक के बात करे गे हवय अऊ अपन नजरिया, भाखा अऊ संगीत के जरिया ले इलाका के अटाटूट विविधता ला आगू मं रखथे. गुजरात के 305 तालवादक, गायक अऊ साज बजेइय्या के सधारन मंडली कतको किसिम के संगीत के तरीका ला बजाथे. अऊ ये ह कच्छ के एक बखत के संपन्न मौखिक परंपरा, जऊन ह गिरत जावत हवय तऊन ला जीवंत कर देथे. वो ला बंचा के रखे के महत्तम जरूरत हवय काबर के रेगिस्तान के बालू मं वो मन के अवाज धीरे-धीरे फीका परत जावत हवय
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6. मयारू बैरी
कच्छ के एक झिन मुटियारिन के दुख भरे गीत जऊन ह बिहाव के बाद अपन परिवार ले दूरिहा चले गे हवय अऊ अपन पीरा बतावत हवय
5. कच्छ: बिसवास अऊ भाईचारा के मीनार
एक ठन अइसने इलाका के लोकगीत जऊन ह राजनीतिक उथल-पुथल के बाद घलो संगीत, वास्तुकला अऊ संस्कृति मं अपन मेलजोल ले भरे परंपरा ला बचा के रखे हवय. ये भक्ति गीत अपन संग रेगिस्तान के गजब के महक ला लेके आथे
4. बिदा होवत नोनी के पीरा
बिहाव के बाद अपन दाई-ददा के घर ले बिदा होवत नोनी के मन के बात ये कच्छी गीत मं झलकत हवय
3. जिहां अजादी के गीत गावत महतारी
ये लोकगीत मं कच्छ के देहात के माइलोगन मन जयदाद मं बरोबर हक हिस्सा सेती अवाज उठावत हवंय
2. कच्छ के झील अऊ प्रेम कथा
भुज के ये कच्छी लोकगीत मं मया अऊ तड़प ला बताय गे हवय. ये ह पारी मं कच्छी लोक गीत मन के कड़ी मं दूसर आय
1. कच्छ के मीठ पानी: रण के गीत
गुजरात के ये उत्तर-पच्छम इलाका के एक ठन गीत कच्छ के लोगन मन के अऊ संस्कृति के बखान करथे
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