पी. सेनरायपेरुमल को राजा-रानी अट्टम रंगमंच में भाग लेने के कारण स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, जो कि मुख्यतः समाज में कथित रूप से निचली समझी जाने वाली जातियों द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली रंगमंच विधा है. पी. सेनरायपेरुमल और उनके भाईयों ने अपना बचपन महिला किरदारों को निभाते हुए बिताया, और इस कारण उन्हें भाषाई दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न और परंपरा का भी बोझ सहना पड़ा.
क़रीब 23 साल की उम्र में उन्होंने शिक्षा हासिल करने की एक और कोशिश की और इस दौरान वे रातों को नाचकर अपना गुज़ारा करते रहे. अंततः उन्होंने वह शिक्षा हासिल की जिससे उन्हें व्यवस्था के तहत वंचित रखा गया था. वह जिस लोक परंपरा को जीवन भर जीते आए थे उन्होंने न केवल उस क्षेत्र में पीएचडी की, बल्कि उन्होंने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा भी बनाए रखा. लेकिन उनका ये भरोसा जल्द ही तोड़ दिया गया.


