नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य मं वन रक्षक (फारेस्ट गार्ड) ताराचंद गोंड ह अपन 13 बछर के नउकरी मं हुंर्रा/ हुँड़रा/ हुडरा ले जियादा बघवा देखे हवय. चस्मा पहिरे चमकत आंखी के संग 34 बछर के ये मनखे ये बात ला लेके हँस परथे.
मजा के बात ये आय के वो ह देश (भारत) के सबले जुन्ना पार्क मं गोठ-बात करत हवय जेन ह नंदावत जावत हुंर्रा मन बर आय: बघवा मन ला तो हालेच मं लाय गे रहिस. फेर हुंर्रा (कैनिस ल्यूपस पैलिप्स) – हुंर्रा मन के जुन्ना नस्ल आय जेन ह हमरेच देस मं देखे बर मिलथे, देखे बर भारी मुस्किल आय.देस मं सिरिफ 3,000 ले कुछु जियादा हुंर्रा हवंय – जेन ह साल 2022 मं गिनती करेगे 3,682 बघवा ले घलो कम आय.
ताराचंद जब पहिली पईंत हुंर्रा देखे रहिस, वो बखत ला कभू बिसोरे नइ ये: ये गोंड आदिवासी गार्ड ह बताथे, “मंय गश्त सुरु करे के दू बछर बाद पहिली पईंत हुंर्रा देखे रहेंय. मंय भरई सर्कल [रेंज के] मं बड़े रेंजर के संग रहेंय, जब हमन दूरिहा ले ये जानवर ला देखे रहेन. वो ह हमन ला देख के भागत रहय. मंय वोला पूछेंय ये काय आय अऊ वो ह कहिथे, ये ह भेड़िया (हुंर्रा) आय. ये उहिच जानवर आय जेकर बर ये अभ्यारण्य बनाय गे हवय.”
बनेच लंबा बखत तक ले, हुंर्रा नौरादेही मं बड़े शिकारी जानवर रहिन, जेन मन मध्य प्रदेश के दक्खिन विंध्य पहाड़ी मं बगरे झाड़ीदार जंगल मं राज करत रहिन. भारी लजकुरिया होय सेती, वो मन ला देखे हमेसा मुस्किल रहे हवय अऊ अक्सर खखरा (सियार) ला हूँर्रा समझ लेय जाथे. फॉरेस्ट वॉचमैन शुभम रायकवार कहिथे, “जब तुमन वोला देखथो त एकेच हिस्साच दिखथे, काबर के वो ह लोगन मन ला देख के भागत रहिथे.”
700 हुंर्रा के संग, मध्य प्रदेश मं कोनो घलो राज के बनिस्बत हुंर्रा मन के जियादा आबादी हवय.ओकर बाद घलो, “येला पकड़े धन देखे भारी मुस्किल आय. मंय तुमन ला बतावंव, हुंर्रा बघवा ले घलो जियादा चालाक होथे!” डॉ.अनिरुद्ध मजूमदार कहिथे. जबलपुर मं स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट मं वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट, वो ह ओकर मन के बेवहार के अध्ययन करत हवय, अऊ चार बछर के एक ठन प्रोजेक्ट के अगुवई करत हवय: नौरादेही वाइल्डलाइफ डिवीजन मं हुंर्रा मन के इकोलॉजी अऊ येकर संरच्छन के असर.













