चंपा वट्टी के बचवा के बंदर लगभग उठा ले गइल रहे. उनका संगे ई घटना राजपुर के उनकर गांव लगे के जंगल में भइल रहे. उहंवा ऊ आपन बच्चा के पीठ पर बान्हले हाट में बेचे खातिर जंगल में नीचे गिरल महुआ आ साल के बिया बीनत रहस.
ऊ याद करत कहली, “हम तनी देर खातिर आपन लइका के भुइंया पर धर देले रहीं. तबे एगो बंदर आइल आ ओकरा के उठा ले जाए लागल.” ओह घरिया से उनका बच्चा लेके जंगल में काम करे जाए से डर लागेला.
बाकिर अब उनका आपन लइका के जंगल ले जाए के जरूरत नइखे. छत्तीसगढ़ के गांवन में चंपा जइसन माई लोग दिन में आपन छोट लइका के लगे के ‘लइका घर’ (बच्चा संभारे वाला घर) में छोड़ के कमाए जा सकेला. उहंवा छव महीना से तीन बरिस तक के बच्चा सब के दिन भर रखे के बंदोबस्त रहेला.


















