ब्रेल और बैलट
सरकारी नियमों में शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे लोगों के लिए वोट देने का प्रावधान है, पर बबलू कोईबर्तो जैसे कुछ लोग 2024 के आम चुनाव की प्रक्रियाओं में भाग लेने को लेकर तय नहीं हैं



सरकारी नियमों में शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे लोगों के लिए वोट देने का प्रावधान है, पर बबलू कोईबर्तो जैसे कुछ लोग 2024 के आम चुनाव की प्रक्रियाओं में भाग लेने को लेकर तय नहीं हैं
स्कूलों के दो साल तक बंद रहने और सीखी हुई चीज़ों को भूल जाने के बाद, बौद्धिक अशक्तता के पीड़ित बच्चे अपनी पुरानी दिनचर्या का फिर से पालन करने की कोशिश में ख़ासी जद्दोजहद उठा रहे हैं
सरन्या अपने तीनों दृष्टिहीन बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती हैं. अकेले ही इन बच्चों को पालने वाली इस मां को गुम्मिडिपूंडी से चेन्नई तक का 100 किमी का सफ़र तय करती हैं
जनवरी 20, 2023 | एम. पलनी कुमार
मुथुराजा का हाथ चित्रा के कंधे पर है, और वह उन्हें रास्ता बताती हैं - मदुरई ज़िले के ये पति-पत्नी जीवन की मुश्किलों का एक साथ मिलकर सामना करते हैं. लेकिन ग़रीबी, ख़राब स्वास्थ्य, और शारीरिक अक्षमता उनके लिए रोज़मर्रा के जीवन को मुश्किल बना देती है
श्रीनगर में विस्थापितों के लिए बनाई गई 'रख-ए-अर्थ' हाउसिंग कॉलोनी में बसने के बाद से, सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित अपने बेटे के लिए स्वास्थ्य सेवाएं जुटाने और आजीविका के लिए काम ढूंढने में, अखून परिवार को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है
मई 6, 2021 | कनिका गुप्ता
महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के किसान परिवारों में, ऑनलाइन कक्षाओं के विकल्प न होने से, बौद्धिक रूप से अशक्त छात्रों पर बुरा असर पड़ा है और उनके माता-पिता की चिंता बढ़ रही है
अपना एक पैर ख़राब होने के बावजूद, पेशे से मछुआरे प्रकाश भगत अपने गांव 'परगांव' के लोगों के लिए खाना बना रहे हैं, जो नासिक से दिल्ली तक चल रहे वाहन मोर्चे में शामिल हैं. यह मोर्चा कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में निकाला गया है
दिसंबर 23, 2020 | पार्थ एम एन एवं श्रद्धा अग्रवाल
प्रतिभा हिलीम को पिछले साल गैंग्रीन की वजह से अपने दोनों पैर खोने पड़े थे। लेकिन पालघर, महाराष्ट्र की इस आदिवासी टीचर ने साहस के साथ अपने ही घर पर उन बच्चों को पढ़ाना जारी रखा है, जिनके पास ‘ऑनलाइन शिक्षा’ तक पहुंच के अवसर काफ़ी कम हैं
दिसंबर 3, 2020 | श्रद्धा अग्रवाल
विमल और नरेश ठाकरे, दोनों दृष्टिहीन, मुंबई की लोकल ट्रेन में रूमाल बेचते थे। लॉकडाउन ने उनकी, और कई अन्य की आय छीन ली। उन्हें सरकार से मामूली सहायता मिल रही है और भविष्य अनिश्चितताओं से भरा हुआ है
जुलाई 10, 2020 | ज्योति शिनोली
सारा जीवन बीमारी और कई सर्जरी से जूझने के बाद, पुणे ज़िले के हडशी गांव की बिबाबाई लोयरे का शरीर झुककर सिकुड़ गया है. इसके बावजूद, वह खेती से जुड़े काम करती हैं और अपने लक़वाग्रस्त पति की देखभाल भी करती हैं
मानसिक रूप से अक्षम महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों का उल्लंघन, अक्सर उन्हें अपना गर्भाशय निकलवाने के लिए मजबूर करके किया जाता है. लेकिन महाराष्ट्र के वाडी गांव में, मालन मोरे भाग्यशाली हैं कि उन्हें अपनी मां का साथ मिला
जून 9, 2020 | मेधा काले
कुछ साल पहले एक दुर्घटना में अपना एक पैर गंवा चुके बिमलेश जायसवाल ने लॉकडाउन के दौरान अपनी पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ, महाराष्ट्र के पनवेल से मध्य प्रदेश के रीवा तक, 1,200 किलोमीटर की यात्रा बिना गियर वाले स्कूटर से पूरी की
मई 23, 2020 | पार्थ एम एन
मिज़ोरम के राजीव नगर के एक दृष्टिहीन शिल्पकार, देबहाल, स्मरण और स्पर्श से पिछले 50 सालों से आजीविका के लिए जटिल टोकरियां बना रहे हैं, और कहते हैं कि वह अभी बांस का भी घर बना सकते हैं
जुलाई 25, 2019 | लोकेश चकमा
क्या आधार कार्ड सभी सरकारी योजनाओं तक पहुंच को बहुत आसान बनाता है? उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) ज़िले के एक गांव में भूख के चलते हुई मौत से पता चलता है कि किसी कार्ड को हासिल करने की प्रक्रिया ग़रीबों की जान तक ले सकती है
जुलाई 9, 2018 | पूजा अवस्थी
कुष्ठ रोग के कारण पार्वती देवी की अंगुलियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं. अतः लखनऊ में कचरा चुनने वाली सफ़ाईकर्मी और संभवत: इस बीमारी से पीड़ित हज़ारों अन्य लोगों को आधार कार्ड नहीं मिल सकता; और इसके बिना उनको विकलांगता पेंशन या राशन भी नहीं मिल सकेगा
मार्च 30, 2018 | पूजा अवस्थी
आधी सदी से, झारखंड के पूर्वी सिंहभूम ज़िले के यूरेनियम खदान, जिसमें जादूगोड़ा खदान भी शामिल है, के पास बसे गांवों के लोग रेडियोएक्टिव रिसाव और ज़हरीले तालाबों के चलते भारी क़ीमत चुका रहे हैं
मार्च 19, 2018 | सुभ्रजीत सेन
मराठवाड़ा में निरंतर अकाल के कारण सावरखेड़ जैसे गांव के लोगों को बोरवेल का फ्लोराइड से प्रदूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिसकी वजह से बहुत से लोगों की हड्डियां कमजोर हो चुकी हैं
जनवरी 12, 2018 | पार्थ एम एन
पारी वॉलंटियर संकेत जैन, भारत भर के 300 गांवों का दौरा करने की चाह रखते हैं। अन्य स्टोरीज के अलावा, यह फीचर उन्हीं की रचना हैः जो गांव के किसी दृश्य या घटना की फोटो तथा उस फोटो का स्केच है। पारी पर इस सिलसिले की यह छठी कड़ी है। पूरी तस्वीर या स्केच को देखने के लिए सलाइडर को दायें या बायें किसी एक तरफ खींचें
मार्च 05, 2018 | संकेत जैन
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