
SANGUR, PUNJAB
|WED, SEP 10, 2025
भारत के गाँव-देहात मं असकत देह के संग गुजारत जिनगी
भारत के गाँव-देहात मं बनेच अकन लोगन मन विकलांगता धन देह के अलग-अलग रूप ले असकत होय के संग जिनगी गुजारत हवंय. संजोग ले जनम ले, अऊ येकर छोड़, विकलांगता समाजिक धन सरकार के चेत नइ धरे घलो आ सकथे- जइसने के, झारखंड मं यूरेनियम खदान मन के तीर मं रहे सेती, धन मराठवाड़ा मं सरलग पानी नइ गिरे सेती लोगन मन ला मजबूर होके फ्लोराइड वाले पानी पीये ला परथे. कतको बेर, विकलांगता बीमारी धन इलाज मं लापरवाही सेती होथे - लखनऊ मं कचरा बिनेइय्या पार्वती देवी के ऊँगरी मन कोढ़ रोग सेती खराब होगे हे, फेर मिजोरम के देबहाला चकमा चेचक (माता) सेती अंधवा होगे, अऊ पालघर के प्रतिभा हिलिम ला गैंग्रीन सेती अपन चरों हाथ-गोड़ गंवाय ला परिस. कुछेक लोगन मन मं दिमागी कमजोरी होथे - श्रीनगर मं छोटे मोहसिन ला सेरेब्रल पाल्सी (अइसने बीमारी, जनम ले धन दिमाग मं झटका लगे सेती हाथ-गोड़ काम नइ करय) हवय, फेर महाराष्ट्र के प्रतीक ला डाउन सिंड्रोम ( दाई-ददा डहर ले मिले बीमारी जेन मं दिमागी बिकास देरी ले होथे) के पता चलिस. अइसने कतको मामला मं, गरीबी, असमानता, भरपूर इलाज के सुविधा नइ मिले अऊ भेदभाव सेती चुनौती अऊ घलो बाढ़ कथे. असकत देह के संग जिनगी गुजारत लोगन मन के अलग-अलग राज ले पारी के कतको कहिनी हवंय
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6. 'असमंजस मं हवं के कऊन ला वोट देवंव'
विकलांग लोगन मन ला वोट देय के प्रावधान के सरकार के नियम के बाद घलो, बबलू कैबरतो जइसने कुछु लोगन मन आम चुनाव 2024 मं वोट डारे ला तय नइ करे सके हवंय
5. ‘गुरतुर मयारू बोली ले काय हासिल करे जाय सकथे’
ये शिक्षक दिवस मं, पारी ह तऊन खास शिक्षक मन के तिहार मनाथे जऊन मन अपंगहा लोगन मन ला पढ़ाथें.वो मन दिखा देथें के कइसने धीरज अऊ लगन के संगे-संग अपन छात्र मन बर भारी मया-दुलार सब्बो बढ़िया पढ़ाय के नेंव आय
4. छुट्टी के बाद फिर ले सीखे के लंबा रद्दा
दू बछर बीते इस्कूल आय अऊ कतको महत्तम पढ़ई के नुकसान के बाद, दिमागी रूप ले कमजोर लइका मन ला अपन जुन्ना बंधे-बधाय तरीका मं फिर ले संगती बिठाय मं भारी जूझे ला परत हवय
3. आस के उजियार ला खोजत सरन्या
तीन नेत्रहीन लइका मन के महतारी सरन्या वो मन के संग इस्कूल जाथे. ये अकेल्ला दाई-ददा ला रोज के गुमिडीपुंडी ले चेन्नई 33 कोस (100 किलोमीटर) आय-जाय ला परथे
2. ‘मोर हाड़ा मन पोंडा हो गे हवंय’
सरीजिनगी कतको बीमारी ले जूझत अऊ कतको आपरेसन कराय के बाद, पुणे जिला के हडशी गाँव के बिबाबाई लोयरे के देह ह झुक के धंसगे हवय. येकरे बाद घलो वो ह खेती किसानी के बूता करथें अऊ लोकवा ले परे अपन घरवाला के देखभाल घलो करथें
1. देह-दिमाग ले अच्छम माइलोगन ला बोझ समझथे समाज
दिमागी अच्छम माइलोगन मन के यौन अऊ जचकी सेहत के हक ला टोरे, अक्सर वो मन ला अपन कोख हेरवाय बर मजबूर करे जाथे. फेर महाराष्ट्र के वाडी गाँव मं, मालन मोरे भागवाली आय के ओकर पाछू ओकर दाई खड़े हवय
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