टक-टक-टक!
कोडावटीपुड़ी में एगो तिरपाल से ढकल झोपड़ी में से बड़ा लयबद्ध आवाज बहरी आ रहल बा. मुलमपाका भद्रराजू चेक्का सुत्ती के उपयोग कर के एगो बरतन के थपथपा रहल बाड़ें. चेक्का सुत्ती एगो चप्पू निहर लकड़ी के हथौड़ी हवे जवन बरतन के एकदम सटीक गोल आकार में ढालेला.
“मोट चेक्का सुत्ती बरतन के तली के बंद करे खातिर होखेला. बाकी नियमित वाला सतह के ढेर चिक्कन बनावे खातिर उपयोग होखेला,” जरूरत के हिसाब से हथौड़ी बदल के काम करत 70 साल के भद्रराजू समझावेलन.
उ बतावेलन कि पतरका, नियमित आकार वाला ताड़ के पेड़ (बोरासस फ्लैबलिफ़र) के टहनी से बनावल जाला आ मोट वाला अर्जुन के पेड़ (टर्मिनिलिया अर्जुन) से बनावल जाला. उ पतरका वाला चेक्का सुत्ती उठा लेले बाड़ें आ अब आवाज काफी कम हो गईल बा.
उनके 20 इंच व्यास वाला बड़का बरतन बनावे में लगभग 15 मिनट लाग जाला. अगर कवनो किनारा टूट फूट जाला त उ अउरी माटी लगा के थपथपावे वाला प्रक्रिया से ओके तुरन्ते ठीक क लेलन.









