माइलोगन अऊ मरद लोगन मन के गोदना अलग-अलग रहे हवय. माइलोगन मन अपन जिनगी के अलग अलग बखत ला लेके गोदना गुदवावत रहिन – जइसने जवानी आय बखत धन बिहाव होय के बाद. वो मन के गोदना परिवार के मरद लोगन मन के कोनो जिनिस हासिल करे के सुरता मं घलो होवत रहिस.
“एक झिन कोन्याक माइलोगन के जिनगी कतको बदलाव ले गुजरथे. अपन ददा के कबीला मं जन्मे, ओकर बिहाव आने कबीला मं होथे. ओकर बाद घलो, बिहाव के पहिली वो ह जेन गोदना गुदवाय रहिथे, वो ह जिनगी भर अऊ मरत तक ले ओकर संग रहिथे. ये वो चिन्हारी आय जेन ह कभू नइ बदलय, ये वो चिन्हा आय जेन हा वोला बताथे के वो ह कोन आय अऊ कहां ले आय हवय,” अमो कोन्याक कहिथे.
मोन के बासिंदा, वोला सुरता हवय के वो ह अपन बबा–डोकरी दाई के देह मं गोदना देखे रहिस. 32 बछर के ये शोध करेइय्या भारी उछाह ले बताथे, “बचपना मं मंय अक्सर गोदना गुदवाय ला लेके कतको कहिनी सुने रहेंय, के ये कइसने करे जावत रहिस. ये कतक पीरावय, अऊ येकर बाद घलो लोगन मन ला कतक गरब होवय. ये कहिनी लोककथा जइसने पीढ़ी दर पीढ़ी, गरब अऊ मान ले सुनाय जावत रहिस. मोर बर, ये गुदना सुरता के नक्सा जइसने रहिस, जेन ह न सिरिफ चमड़ी मं फेर हिरदे के भीतरी ले गुदाय रहिस.”
कोन्याक लोगन मन पारंपरिक रूप ले सिर कलम करेइय्या रहिन, अऊ लड़ई जीते के बाद जीत के सुरता मं मरद लोगन मन के चमड़ी मं गोदना गुदवाय जावत रहिस. अमो कहिथे के ये मं जियादा धियान देय सेती अक्सर गोदना उपर शोध अऊ कहिनी ले माइलोगन मन ला धियान नइ देय गे हवय, वो ह अपन डोकरी दाई/दादी के सुनाय गे गोदना के कहिनी मन ला सुरता करथे, “ वो ह अक्सर मोला बतावत रहय के ये काम ह कतक दरद-पीरा वाले रहिस, चमड़ी ले लहू बोहाय लगय अऊ सूज जावय. ओकर बाद घलो वो मन ला कतक गरब मसूस होवय अऊ सुग्घर लगय.”
ये गाँव ले थोकन दूरिहा मं न्गोनफे रहिथे, जेन ह ये बखत 70 बछर के हवय. वो ह घलो गोदना गोदे के हुनर ला अपन दीदी अऊ चचेरी बहिनी मन ले सीखे रहिस, जेन मं अपन दाई ले ये हुनर सीखे रहिन. वइसे, वो मन ला कभू येला करे के मऊका नइ मिलिस काबर के ये ह सिरिफ ‘रानी’ – मतलब सबले बड़े घरवाली के हक रहिस. नोन्फे 'रानी' के गोदना गुदवाय मं मदद करत रहिस – कांटा संकेल के राखे, गोदना गोदेइय्या मन बर रांधे अऊ जेन ह गोदना गुदवावत रहय वोला धरे रहय जेकर ले पीरा होय बखत वो ह जियादा झन हिले-डोले. बोले बखत नोन्फे दरद के भाव ला बतावत मुंह बनाय लगथे. ओकर बाद ह वो जमाना ला सुरता करके जोर ले हँसे लगथे.
जब पारी ओकर ले भेंट करे गीस, त वो ह बांस के एक ठन कुरिया मं बइठे रहिस, जऊन ह अंघ के अहाता मं बने कतको कुरिया मन ले के ठन रहिस. वो ह धीरे-धीरे गोठियाथे, ओकर आवाज तिहार के मैदान ले आवत कलर-कलर मं दब जाथे. जब हमन ओकर फोटो खींचे ला कहेन, त वो ह राजी खुसी उठगे अऊ रोज के पारंपरिक कपड़ा अऊ गहना पहिरे चले गीस.