“ई त्योहार हमनी में उम्मीद जागवेला,” बालाबती मांझी कहली. ऊ आ कुटिया खोंड समुदाय के बाकी औरत लोग स्थानीय देसी बीज महोत्सव में शामिल होखे के तैयारी करत रहली. पहाड़ी आ घना जंगल से घिरल उनकर गांव में बुर्लुबरू के तैयारी से चहल-पहल रहे. औरत लोग आपन माथा प देसी बीज भरल माटी के घड़ा धईले पारंपरिक ढोलक, ढप आ तामुक के ताल प नाचत गावत रही.
ऊ लोग अपना गांव के बीचोंबीच धरानी पेनू (धरती देवी) के मंदिर प जुटल रहे. गांव के पुजारी के कईल पूजा के बाद ऊ लोग कंधमाल जिला के तुमुदीबांधा प्रखंड में अपना गांव के लगे एगो खुला मैदान के दने आपन जुलूस ले गईल.
“हमनी के बढ़िया फसल खातिर पूजा करेनी जा. कबो कबो हमनी के अपना देवता के खंसी आ मुर्गा भी चढ़ाई ला जा. बढ़िया फसल ले साल भर हमनी के पेट भरी ला जा. त्योहार में हमनी के दूसरा साथे बीज के लेन देन करी ला जा, एहसे हमनी के बीज लेवे वाला खातिर भी निमन फसल के प्रार्थना करी ला जा.”
बालाबाती आ कोटागढ़, फिरिंगिया आ तुमुदीबंधा प्रखंड के गांव के लगभग 700 आदिवासी मेहरारू किसान हर साल होखे वाला बीज महोत्सव में शामिल भइल बाड़ी जा. मार्च में फसल के समय के आसपास आयोजित होखे वाला ई आयोजन पारंपरिक बीज के प्रदर्शनी आ आदान प्रदान, एगो भुलाइल तरीका के फिर से जिंदा करे आ खेती के तरीके के बात करे के मौका ह.







