“दीदी, का इहंवा हमनी आपन भाषा में बात कर सकिला?” पनरह बरिस के अंश उरांव अपना हाथ में कुरुख किताब पकड़ले हमरा से पूछलन.
हमनी पस्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिला के एगो स्कूल में बानी. इहंवा चाय बागान मजूर लोग के बच्चा सब पढ़े आवेला. लीश नदी लगे पड़े वाला एह बागान में अंश आउर हमार माई-बाऊजी लोग काम करेला.
इहंवा काम करे वाला जादेतर मजूर जेका हमनियो के परिवार उरांव जनजाति से आवेला. हमनी के पुरखा लोग चार पीढ़ी पहिले छोटा नागपुर के पठारी इलाका मतलब झारखंड के रांची, गुमला, सिमडेगा जइसन जिला से आइल रहे. आपन-आपन घरे हमनी अभियो कुरुखे बोलेनी, ई हमनी के समाज के भाषा ह. बाकिर बाहिर हिंदी आ बंगाली बोलिला. एहि से अंश के अबले आपन माईबोली कुरुख के कवनो किताब के दर्शन ना भइल रहे.
हम इहंवा लीश रिवर के चाय बागान के पाटीबाड़ी इलाका में पलइनी-पोसइनी. जनगणना हैंडबुक में एकर नाम ‘लिशरिवर’ लिखल बा. बाकिर गांव आउर स्थानीय प्रशासन एकरा ‘लीश रिवर’ ही कहे आ लिखेला.



















