
SANGUR, PUNJAB
|MON, JAN 15, 2024
क्वियर कम्यूनिटी की कहानियां
क्वियर समुदाय के लोग अपनी लैंगिक पहचान, लैंगिक अभिव्यक्ति, यौनिकता और सेक्सुअल रुझान के आधार पर ख़ुद की पहचान करते हैं. उन्हें अक्सर सामूहिक तौर पर एलजीबीटीक्यूआईए+ समुदाय के रूप में संबोधित किया जाता है, और इसमें लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वियर, इंटरसेक्स, एसेक्सुअल और अन्य शामिल हैं. उनकी सामाजिक और क़ानूनी तौर पर स्वीकृति हासिल करने की यात्रा काफ़ी संघर्षपूर्ण रही है. क्वियर समुदाय के लोग अक्सर बुनियादी अधिकारों से भी वंचित रह जाते हैं, जिनकी कहानियां इस संग्रह का हिस्सा हैं. उन्हें व्यक्तिगत और व्यावसायिक, दोनों ही दुनिया में सामाजिक स्वीकृति, न्याय, पहचान और सुरक्षित भविष्य के लिए लगातार जूझना पड़ता है. इस संग्रह में भारत के अलग-अलग इलाक़ों में दर्ज कहानियां शामिल की गई हैं. इनमें क्वियर समुदाय के लोगों की ख़ुशियों, अकेलेपन और आपसी एकजुटता की कहानी बयान होती है, जो ख़ुद की पहचान से जुड़े संघर्षों से जूझ रहे हैं
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9. ग्रामीण भारत में क्वियर समुदाय का दैनिक जीवन
पारी लाइब्रेरी प्राइड माह में उस क्वियर समुदाय के इर्द-गिर्द उठने वाली आवाज़ों और डेटा को सामने रख रहा है, जो बड़े महानगरों और शहरों से दूर रहते हैं और जिन्हें अपने निजी और कारोबारी जीवन में सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है
8. धर्मशाला: क्वियर समुदाय के सतरंगी सपनों का मार्च
हिमाचल प्रदेश में आयोजित हुए पहले प्राइड मार्च में क्वियर समुदाय के अधिकारों की पैरवी की गई, और राज्य के गांवों व छोटे क़स्बों से तमाम लोगों ने इसमें भाग लिया
7. नाटक के ज़रिए ख़ुद के होने की गवाही देता ट्रांस समुदाय
बहुत कम ऐसा होता है, जब ट्रांस समुदाय के लोगों को थिएटर की दुनिया में परफ़ॉर्म करने का मौक़ा मिलता है. अंतरराष्ट्रीय ट्रांसजेंडर दृश्यता दिवस - 31 मार्च - के अवसर पर, ट्रांसजेंडर समुदाय के जीवन और समाज में होने वाले भेदभाव के ख़िलाफ़ उनके संघर्ष पर आधारित नाटक ‘संदकारंग’ पर केंद्रित फ़ोटो स्टोरी
6. महानगर में शिनाख़्त की दहलीज़ पर खड़ा प्रेम
महाराष्ट्र के ग्रामीण हिस्से से आई एक युवा औरत और एक परलैंगिक (ट्रांस) पुरुष सामाजिक स्वीकृति, न्याय, पहचान और एक साथ अपने सुरक्षित भविष्य के लिए संघर्ष और हंगामे से भरी अपनी प्रेम कहानी सुनाते हैं
5. ‘मुझे फिर कभी भारत के लिए खेलने का मौक़ा नहीं मिला'
बोनी पाल को उनकी इंटरसेक्स विविधताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल खेलने की अनुमति नहीं थी. राष्ट्रीय इंटरसेक्स मानवाधिकार दिवस के मौक़े पर 22 अप्रैल को उन्होंने अपनी पहचान और संघर्षों के बारे में बात की
4. मदुरई के ट्रांस आर्टिस्ट: शोषण, अकेलापन, और आर्थिक तंगी
समाज से शोषित, परिवार द्वारा त्याग दिए गए, और अपनी आजीविका खो बैठे, तमिलनाडु के ट्रांस लोक-कलाकार अपने जीवन के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं
3. मदुरई के ट्रांस फ़ोक आर्टिस्ट: ‘दुःख ही जीवन की कथा रही’
महामारी ने पूरे तमिलनाडु में न जाने कितने लोक कलाकारों की ज़िंदगी तबाह कर दी, ट्रांस वुमन कलाकारों पर इसका असर अपेक्षाकृत रूप से अधिक भयावह हुआ, जिनके पास बमुश्किल ही कोई काम या आमदनी का कोई ज़रिया है और न ही उन्हें सरकार की तरफ़ से ही किसी भी तरह की मदद हासिल हुई है
2. ‘लोग हमें ऐसे घूरते हैं जैसे हम कोई बुरी आत्मा हों’
इचलकरंजी शहर में ट्रांसजेंडर (विपरीतलिंगी) व्यक्तियों को हर जगह भेदभाव का सामना करना पड़ता है – घर में, स्कूल में, आवास में, सड़क पर। वे आम लोगों के रूप में देखे जाने और थोड़ा सम्मान के साथ काम पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं
1. बदलते अयोध्या में बदलता रामकथा के मंचन का स्वरूप
दशहरे के महीने में, रामकथा सिंगिंग पार्टी नामक साधारण सी गायन मंडली, दिन की अपनी नौकरी पर वापस लौटने के पहले, एक मंच से दूसरे मंच तक भागती-दौड़ती रहती हैं. वहीं, दूसरी ओर रामकथा का मंचन समकालीन राजनीति के साए से घिरता जा रहा है
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