
SANGUR, PUNJAB
|WED, JUL 23, 2025
लोकसभा चुनाव, 2019: ग्रामीण मतदाता
ग्रामीण भारत के लोग किस आधार पर वोट डालते हैं? ग्रामीण मतदाताओं के लिए कृषि संकट, ऋण माफ़ी, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कें, स्कूल, नौकरियां, बेहतर मज़दूरी और सम्मानजनक जीवन जीने से जुड़े मुद्दे अहमियत रखते हैं. पारी ने यही बात आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तराखंड के गांवों में देखी. कुछ जगहों पर, दलगत राजनीति का असर दिखा; अन्य जगहों पर उन उद्योगों या परियोजनाओं के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा नज़र आया जिनके चलते लोगों से उनकी ज़मीन छीनी जा रही है और वे पानी से वंचित हो रहे हैं, या लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है. पूरी कवरेज यहां पढ़ें.
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9. गुरुग्राम चुनाव का रुख़ पलट सकता है सुरक्षा और बिजली का मुद्दा
हरियाणा के गुरुग्राम ज़िले का एक ‘शहरी गांव’ नयागांव, ‘मिलेनियम सिटी’ के मॉलों और कार्यालयों के बिल्कुल उलट है. इसके निवासी चाहते हैं कि 12 मई को वोट देने के बाद उनके गांव के बुनियादी ढांचे को ठीक किया जाए
8. भुज: मतदान का खेल और महिलाओं के मुद्दे
गुजरात के कच्छ ज़िले के भुज शहर और आसपास के गांवों में, युवा महिलाएं और अन्य लोग चुनाव से जुड़ी अपनी आशाएं और शंकाएं साझा कर रहे हैं. साथ ही, उनमें से कुछ यह भी बताते हैं कि 23 अप्रैल के दिन वह लोकसभा चुनावों में वोट क्यों नहीं डाल रहे
7. नीलगिरी के आदिवासियों का वोट शराब की बिक्री के ख़िलाफ़
गुडलुर ब्लॉक की महिलाओं का कहना है कि शराब की लत और राज्य द्वारा संचालित शराब की दुकानें उनके घर उजाड़ रही हैं. किसी भी उम्मीदवार के लिए यह मुद्दा नहीं है, लेकिन महिलाओं को उम्मीद है कि आज के चुनाव के बाद यह स्थिति बदल जाएगी
6. तूतुकुड़ी के चुनावों में छाया स्टरलाइट का मुद्दा
तमिलनाडु के कुमारेड्डियापुरम गांव में 18 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले मतदाताओं के दिमाग़ पर, 22 मई 2018 को हुई पुलिस फ़ायरिंग की घटना हावी है, जिसमें स्टरलाइट कॉपर प्लांट का विरोध कर रहे 14 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी
5. तुमकुर: चुनाव के बाद क़िस्मत बदलने की उम्मीद
कर्नाटक के तुमकुर ज़िले में हाथ से मैला ढोने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा है. उनमें से अधिकतर लोगों का कहना है कि उन्हें नेताओं पर ज़्यादा भरोसा तो नहीं है, लेकिन बेहतरी की उम्मीद में वे 18 अप्रैल को मतदान करेंगे
4. पहाड़ों का चुनावी मुद्दा: राजमार्ग नहीं, रास्ते की चाह
उत्तराखंड के अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी गांवों में जिन्हें खच्चरों वाले मार्ग से मीलों पैदल चलना पड़ता है, वे उस राजनीतिक पार्टी का नाम पूछते हैं जो लंबे समय से अधूरी पड़ी सड़क के निर्माण का काम पूरा कराएगी, ताकि वे 11 अप्रैल को उस पार्टी को वोट देकर उसे सत्ता में पहुंचाएं
3. यवतमाल: मतदान की लड़ाई में शामिल एक विधवा किसान
खेतिहर मज़दूर तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वैशाली येडे, जिनके पति ने 2011 में आत्महत्या कर ली थी, पूर्वी महाराष्ट्र से साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राजनीति के दबंगों के ख़िलाफ़ लड़ रही हैं
2. टेंभरे गांव में मतदान पर चर्चा
टीवी की बहसों तथा पार्टियों के स्कोरकार्ड के हंगामे से दूर, ग्रामीण महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के लोग इस सोच में पड़े हैं कि कौन सा उम्मीदवार स्वास्थ्य, सड़क, स्कूल, क़र्ज़ माफ़ी, नौकरी इत्यादि से जुड़ी उनकी मुश्किलों को दूर करेगा
1. चंद्रपुर: बंजर भूमि पर खड़े अकेले पेड़ से मिलते चुनावी संकेत
कोयला खदान के चलते पूर्वी महाराष्ट्र के बारंज मोकासा और अन्य गांवों की भूमि और आजीविका के नष्ट हो जाने के बाद, लोगों का कहना है कि भाजपा सांसद ने उचित मुआवजा दिलवाना सुनिश्चित नहीं किया, इसलिए वे 11 अप्रैल को उनको वोट नहीं देंगे
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