"कहर बरपल रहे," विचित्र नाम वाला टाईम पास कहेलन. "बड़ी ढेर लास जरवले रहनी. एतना लास रहे कि सगरो गिनती के बहरा हो गईल."
गंगा नदी के तीरे बसल पटना के सबसे पुरान श्मशान घाट, बांस घाट पर कोविड-19 के कहर बरसले के बाद, एक्कईस बरिस के टाईम पास फेर गुमनाम भईल बाने. महामारी के बेरा ऊ कुछु समय खातिर ए गुमनामी से बाहर आईल रहने. अब ऊ शहर में गुमनाम, बेघर आ बेकाम धाम के घूमेलें.
बेकाम धाम आ बेआमदनी के घुम्मत, ऊ अब आपन नाम, टाईम पास, के सार्थक करत बाने (जियवले बाने).
बाकिर उनके ई नाम ए तरे ना मिलल. एकरा खातिर उनकर चाचा जुगनूराम जिम्मेदार हवें. जब उनकर जनम भईल, तब ऊ (जुगनूराम) सनी देओल के पिच्चर देखी के आइल रहे. जब घर के मेहरारू उनका फुरसतिया कही के रिगवली, त ऊ ओ ताना के लईका के नाम बना देहलस.
"हमके जवन काम मिलेला ऊ हम करेनी." टाईम पास कहेलन. "हम बड़ बड़ शहर में लैटरीन आ कब्बो कब्बो नारी (नाली) साफ करेनी, कब्बो सरल (सड़ल) सूअर उठावेनी, कब्बो लावारिस लास फूंकेनी. हम कचरा भी बीनेली," ऊ काम गिनावेने जवन उनके मिलेला.
हर बेर जब ए शहर के आपन मुरदा, सरल आ फेंकल लास हटावेके होला, त ई टाईम पास जईसन लोगन के खोजेला. अगर मुरदा के बदबू बयार में फैली जाला, टाईम पास बोलावल जाने. रेल के पटरी पर अगर लास पड़ल मिलेला, टाईम पास फेर बोलावल जाने. शहर के कवनो कोना में अगर लावारिश लास मिलेला, पुलिस के जीप भेजल जाला, आ ऊ (टाईम पास) मुर्दाघर के बहरा अगोरेला.
ओके ए खातिर ना बोलावल जाला कि ऊ ए काम में माहिर ह, बाकिर ए खातिर कि ऊ एगो डोम ह. डोम महादलित कहल जाने जवन बिहार के पिछड़ा सामाजिक समूह में से एक ह. 2023 के तत्काल जाति सर्वेक्षण के अनुसार, इनके आबादी 2,36,512 बा, जवन राज्य के कुल आबादी 13.1 करोड़ के मात्र 0.20 प्रतिशत बा.
ई लोग हिंदू वर्ण व्यवस्था में सबसे नीचे बाने. जादेतर लोग अईसन काम में फंसल बाने जवन उनपर बडजातिया लोग थोपले रहे. जईसे मुर्दा फूंकला आ साफ-सफाई के काम.

















