सुरेंदरनगर में, मार्च के महीना में जैसही तापमान बढल, काराभाई मरदाना लोग से कहलन, “दुपहरिया हो गईल, आवा ओगिन अब चले के सुरु कयील जाव.” मर्दाना लोग आगे चले लगाल त मेढ़ा कुल भी पीछे-पीछे चले लागल. सातवा कलास ले स्कूले गईल उनकर 13 साल के पोता, प्रभुवाला, खेत के अरिया के झंखाड़ के पीटता औरी ओहीजा घूमत भेडा कुल के हांक के झुण्ड में ले आवता.
टीनू मेहरारू रस्सी के खटिया, स्टील के दूध के डिब्बा औरी दूसर सब सामान बान्हल. प्रभुवाला दूर गाछ से बान्हल ऊंट के खोल के ऊंहां ले अयिलन जहां उनकर माई, हीराबेन अपना रास्ता के घर औरी दूसर सामान गोट्टा क के धईले रहे कि इ सब समान ऊंट के पीठ प लडा सके.
पांच महीना बाद हमनी काराभाई से दोहरा के भेंट कईनी, रापर तालुका गांव के सड़क प. औरी जत वादा गांव के उनका घरे गईनी. उनकर मेहरारू 70 साल के दोसीबाई आल हमनी के बतवली औरी सबका ला चाय बनवली. “10 बरीस पहिले तक ले हमहूँ अपना परिवार के साथे जातरा करत रहनी, भेड़ा औरी बकरी हमनी के धन ह. उ सब के नीमन से देखभाल होखे के चाहीं, ईहे हम चाहतानी.”
भइयाभाई मकवाना, उनकर पड़ोसिया, सिकायत करे लगलन कि अब त सुखाड़ अक्सरहां पड़ता. “जे पानी नईखे, त हमनी अपना घरे नईखी जा सकत. पछिला छह साल में, हम खाली दू बेर घरे अयिनी”
एगो दूसर पड़ोसी, रत्नाभाई धागल दूसर कुल बात के बारे में बतवलन. “हम सुखाड़ के चलते दू साल बाद घरे लावत सकनी. आ के देखनी कि सरकार हमनी के चरहा के जमीन के चारू ओरिया से घेर देले बा. हमनी दिन भर घूमेंनी तब्बो हमनी के माल के ठीक ठाक घास ना मिल सकेला. हमनी का करी? ओकनी के चरावे ले जाईं कि पींजरा में क दीं? माले पोसल एगो कार बा जवन हमनी जानेनी औरी ओही प गुजर करेनी.”
अनियमित मौसम औरी जलवायु परिवर्तन में बढ़ोतरी के चलते थाकल काराभाई कहेलन, “सुखाड़ के चलते हमनी बहुत दुःख सहेनी. खाए के कुछु ना रहेला. औरी जनरवन, चिरईनो तक खातिर दाना पानी ना रहेला.”
अगस्त में भईल बरखा तनियक रहत दहलस. आल परिवार के लगे सामिलाती में लमसम आठ एकड़ बरखा के भरोसे वाला जमीन बा. जेमे उ लोग बजरा बोअले बा.
मवेशी के चरे, औरी मालधारी के भागे के पीछे बहुत कुल कारन बा. जईसे कि राज्य में असफल औरी गुजारा से कम मानसून, बेर-बेर के सुखाड़, कम होत चरहा के जमीन, तेजी से मशीनीकरण औरी सहरीकरण, बन के कटाई औरी चारा-पानी के कमती. मालधारी कुल के जिनगी के अनुभव से पता चलेला कि एमे से कई गो कारन मौसम औरी जलवायु के फेरबदल जिम्मेदार बा आखिर में ई समुदाय के आयील-गयील गम्भीरे परभावित भईल बा. जवन बेर-नियम बदलता ओह प इ सब एगो जुग से चलता.
काराभाई बिदाई बेर कहलन, “हमनी के सब सकिस्ती के बारे में लिखीहा. औरी हमनी देखें कि एसे का बदलाव आवता. अगर ना, त फेर भगवान त बड़लहीं बाड़न.”
लेखक इ स्टोरी के रिपोर्ट करे में अहमदाबाद औरी भुज के माल्धारी रूरल एक्शन ग्रुप(एमआरएजी) के टीम के साथ औरी सहायता करे ला धन्यवाद करे के चाहतारी.
पारी के जलवायु परिवर्तन प केन्द्रित राष्ट्रव्यापी रिपोर्टिंग के प्रोजेक्ट, यूएनडीपी समर्थित ओ पहल के हिस्सा ह जेकरा में साधारण लोग के जिनगी के अनुभव से पर्यावरण में हो रहल बदलाव के दर्ज कयील जाला.
अनुवाद : स्मिता वाजपेयी