खेत में सन्नाटा पसरल बा, बस कबो कवनो चिरई के फुदके के आवाज आवत बा. मेहरारू लोग खेत में बिचड़ा रोप रहल बाड़ी. गोड़ से पानी में छप-छप के आवाज आ रहल बा. आउर फेरु अचके ऊ लोग गीत गावे लागत बाड़ी, बीहू गीत, बिना कवनो तइयारी के.
जुलाई, चाहे कहीं असमिया पंचांग के हिसाब से ‘आहार’ महीना लागल बा. धान रोपनी के पहिल दिन बा, जेकरा ‘नोभुई’ बोलल जाला. माने नयका बिचड़ा रोपे के दिन. तिटाबर के सालागुडी गांव में हीरा सैकिया के खेत में अबहियो बहुते घाम हो रहल बा, देह झुलसा देवे वाला. हवा में चिपचिपहाट बा, आ काम एतना कि पीठ टूट रहल बा. आज रोपनी के पहिलका दिन बा. बावन बरिस के हीरा सैकिया के चार ठो सहेली लोग खेत के काम में उनकर हाथ बंटावे आइल बा. पचास बरिस के गुनिता सैकिया, गांव के आशा वर्कर बाड़ी. पचपन बरिस के अरूणा बोरा, जे स्कूल में लइका लोग खातिर मिड-डे मील बनावेली. पहिले पंचायत के सदस्य रह चुकल बृस्टिपर्णा सोनवाल. आ नोमी सैकिया, जे खेतियो करेली आउर आपन घरो-दुआरो संभारेली. ई सब औरतन के आपन छोट-छोट खेत बा, जेकरा पर धान के खेती होखेला. एकरे से ओह लोग के घर चलेला. आज जइसे हीरा के लोग मदद करे आइल बा, वइसहीं काल खानी केहू आउर इहंवा काम रही, त हीरा मदद करे जइहन.






