ई छव गो केकड़ा राउर हाथ में समा जाई. एकरा में तनी मरिचाई-नून मिला के पीस देहम, त बहुते स्वादिष्ट लागी. एहि से रामप्रसाद आउर उनकरा संगे स्कूल में पढ़े वाला लइका लोग मिल के कीचड़ वाला केकड़ा (स्काइला सेराटा) के एगो पिलास्टिक वाला बोतल में फंसइलक ह. आउर अब ओकर भोज करे के तइयारी में लाग गइल बा.
लइकन के टोली जरत घाम से बचे खातिर खूब घना गाछ के छांव में बइठल बा. ई जगह आंध्र प्रदेस के श्री सत्य साई जिला के एगो बंजारा बस्ती, मलकवारिपल्ली तांडा बा. इहंवा आज के भोज के हीरो बा, माटी (कीचड़) वाला केकड़ा. एह केकड़ा के ‘हरियर केकड़ा’, आ ‘मैंग्रोव केकड़ा’ भी कहल जाला. ई भारत के पूरबी तट पर मिलेला.
अमडगुर मंडल के ई शांत कोना एगो घाटी में पड़ेला जहां पहाड़ सब के नीचे धान के खेत, टमाटर आउर मरिचाई के बगइचा लागल बा. बाकिर एतना हरियाली देख के लागी कि पानी के कमी ना होई. बाकिर सांच बात त ई बा कि इहंवा के बोरवेल 800 से 1200 फीट गहिराई ले खोदल बा. तबो खेत में पटावे खातिर दिन भर में मात्र आठ घंटा पानी मिलेला.






