देश भर के हज़ारों किसान, 29 नवंबर को चार अलग-अलग रास्तों से पैदल चलते हुए दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए। अगले दिन उन्होंने वहां से संसद मार्ग तक लंबा मार्च निकाला। हाथों में अपने सामान लिए वे अपनी विभिन्न मांगों को दोहरा रहे थे, जिनमें से एक मांग यह भी थी कि कृषि संकट को लेकर 21 दिनों के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए।

Farmers waiting to get the breakfast at Ram Leela Maidan early in the morning at 7.30 AM
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प्रातः 7:30 बजे, रामलीला मैदान में किसान नाश्ते की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

A young farmer sleeping in the Ram Leela Maidan
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बाहर जाने से पहले, एक किसान सुबह की झपकी लेता हुआ।

Kodanda Raman, 62, a farmer from Kanjankollai village in Kattumannarkoil taluka of Cuddalore district in Tamil Nadu reading the Tamil Newspaper to see if they had covered their story on the March towards Ramlila Maidan
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तमिलनाडु के कुड्डलोर जिले के कट्टुमन्नारकोइल तालुका के कंजनकोल्लाई गांव के एक किसान, कोडंडा रमण, यह देखने के लिए अख़बार पर नज़र मार रहे हैं कि किसान मुक्ति मार्च को कवर किया गया है या नहीं।

Adivasi farmers from villages of Nandurbar district in Maharashtra performing their traditional dance at Ramlila Maidan
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महाराष्ट्र के नंदरबार जिले के आदिवासी किसान पारंपरिक नृत्य करते हुए।

Farmers starting their March from Ramlila Maidan towards the Parliament street
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किसान अपने गांवों और जिलों के लोगों को इकट्ठा कर रहे हैं और मार्च के लिए तैयार हो रहे हैं।

Farmers gather together people from their villages and districts and get ready to march.
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रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक जाते हुए प्रदर्शनकारी।

Delhi people in solidarity with the farmer’s March
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दिल्लीवासी किसानों और उनकी मांगों के समर्थन में बाहर निकल रहे हैं।

Volunteers distributing water to the farmers at Parliament Street
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संसद मार्ग पहुंचने पर स्वयंसेवक, मार्च करने वालों को पानी के पैकेट वितरित कर रहे हैं।

Farmers from rural Punjab resting at the Parliament Street
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पंजाब के बुजुर्ग किसानों का एक समूह रामलीला मैदान से लंबी पैदल यात्रा करने के बाद विश्राम कर रहा है।

Farmers sitting at the Parliament Street listening to the speeches of various leaders.
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संसद मार्ग पर एक मंच के सामने बैठे किसान, अपने किसान नेताओं तथा राजनीतिज्ञों के भाषण सुन रहे हैं।

हिंदी अनुवाद: डॉ. मोहम्मद क़मर तबरेज़

डॉ. मोहम्मद क़मर तबरेज़ दिल्ली में स्थित पत्रकार हैं, जो राष्ट्रीय सहारा, चौथी दुनिया और अवधनामा जैसे अख़बारों से जुड़े रहे हैं और इस समय उर्दू दैनिक रोज़नामा मेरा वतन के न्यूज़ एडीटर हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई के साथ भी काम किया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने वाले तबरेज़ अब तक दो किताबें और सैंकड़ों लेख लिखने के अलावा कई पुस्तकों के अंग्रेज़ी से हिंदी और उर्दू में अनुवाद कर चुके हैं। You can contact the translator here:

Sanket Jain

संकेत जैन, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित एक स्वतंत्र ग्रामीण पत्रकार और पारी वॉलंटियर हैं।

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