‘काम ही काम, महिलाएं गुमनाम’, पूरी तरह से क्यूरेटेड, स्टिल-फ़ोटो की एक ऑनलाइन प्रदर्शनी है। यह वीडियो दर्शकों को इस पूरी प्रदर्शनी की सैर कराएगा, जहां असली तस्वीरें दिखाई गई हैं और साथ ही उनके नीचे लेख के रूप में इबारत भी लिखी हुई है। ये सभी तस्वीरें पी साईनाथ ने 1993 से 2002 के बीच भारत के दस राज्यों में खींचीं थीं। ये तस्वीरें मोटे तौर पर आर्थिक सुधार के पहले दशक और राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के आरंभ होने से दो साल पहले तक की हैं।

हिंदी अनुवादः डॉ. मोहम्मद क़मर तबरेज़

मोहम्मद क़मर तबरेज़ 2015 से ‘पारी’ के उर्दू/हिंदी अनुवादक हैं। वह दिल्ली स्थित एक पत्रकार, दो पुस्तकों के लेखक, उर्दू समाचारपत्र ‘रोज़नामा मेरा वतन’ के न्यूज़ एडिटर हैं, और ‘राष्ट्रीय सहारा’, ‘चौथी दुनिया’ तथा ‘अवधनामा’ जैसे अख़बारों से जुड़े रहे हैं। उनके पास अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पीएचडी की डिग्री है। You can contact the translator here:

पी. साईनाथ People's Archive of Rural India के फाउंडर-एडिटर हैं। वह दशकों से ग्रामीण भारत के पत्रकार रहे हैं और वह 'Everybody Loves a Good Drought' के लेखक भी हैं।

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